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Tatvarthsutra Adhikaar 10

केवलज्ञान प्राप्ति का उपाय

  • मोहनीय कर्म के क्षय अर्थात पूर्ण वीतरागता प्रगट होने के अन्तर्मुहूर्त में ज्ञानावरण, दर्शनावरण और अंतराय का नाश होने पर केवलज्ञान प्रगट होता हैं
  • मोह के क्षय के बिना अन्य कर्मो का क्षय सम्भव नहीं हैं

मोक्ष का स्वरुप

  • बंध के कारणों का अभाव (संवर) और निर्जरा से कर्मो का पूर्ण अभाव = मोक्ष
  • जीव के औपशमिक, क्षायोपशमिक, औदयिक और भव्यत्व भाव का अभाव = मोक्ष
  • क्षायिक सम्यक्त्व, केवलज्ञान, केवलदर्शन और सिद्धत्व - के अलावा सब भावो का अभाव = मोक्ष
  • कर्म उपाधि से मुक्त, ऊर्ध्वगमन गति से ऊपर लोकांत में जा विराजता हैं

सिद्धो के अनेक अपेक्षा जैसे क्षेत्र, काल, गति आदि से भेदरूप स्वरुप समझना चाहिए।

इस प्रकार तत्वार्थसूत्र अपरनाम मोक्षशास्त्र नामक शास्त्र समाप्त हुआ।