📄️ अनेकांत-स्याद्वाद
जैन धर्म वस्तु के सत स्वरुप को बताने वाला है। जैसा है वैसा कहने वाला है जो है सो जैन धर्म है। अभी, वस्तु का स्वरुप अनेकान्तात्मक है, अनंत गुण-धर्म से युक्त है। इसलिए विश्व के समस्त द्रव्य कैसे है? अनेकान्तात्मक है। दूसरे शब्दों में कहे तो - अनेकांत वस्तु का ही स्वरुप है।