📄️ आचार्य उमास् वामी श्री, भारत में फिर आओ
आचार्य उमास्वामी श्री, भारत में फिर आओ,
📄️ अरुणोदय
स्पर्श चरण जब मिला गुरु का, ध्रुव स्वभाव स्फुरित हुआ \
📄️ बक (बगुला) संत
देखो देखो! यह संत महात्मा, कैसा घोरतम तप धरे!\
📄️ नाम
नाम होना तो हैं नामाधीन,\
📄️ तू दीन नहीं; दिनकर है
तू दीन नहीं; दिनकर है।\
📄️ आज सत्पथ की बातें सुहायी
आज सत्पथ की बातें सुहायी, निज ज्ञायक पे दृष्टि है आयी,\
📄️ द्रव्य संग्रह (पद्य)
📄️ आप कुछ भी कहो (पद्य)
कथा १
📄️ Kaavya-Prayas
Tirth Vandana