Skip to main content

CYF News

CYF NEWS DRAMA

  • प. विवेक जी ‘सहज’, मलाड

News Anchor:

सभी को सादर जय जिनेन्द्र 🙏🏻

आप देख रहे हैं CYF News, सीधे चैतन्यधाम से।

मैं हूँ निराग शाह, और आइए डालते हैं एक नज़र आज की प्रमुख ख़बरों पर।

आज की मुख्य खबर में आध्यात्मिक संदेश —

  • जो हो चुका है, उस पर अनावश्यक विचार न करें।
  • जो भविष्य में घटित होना है, उसकी अपेक्षाओं में न उलझें।
  • और वर्तमान में, जहाँ परिवर्तन संभव नहीं है, वहाँ बदलती हुई पर्यायों के बीच न बदलने वाले अपने स्वभाव पर दृष्टि केंद्रित करे

अब अन्य समाचारों की ओर रुख करते हैं—

चैतन्यधाम में इस समय CYF शिबिर सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है,

जहाँ देशभर से पधारे युवा

विद्वानों के मार्गदर्शन में धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।

अगले माह 27 जनवरी से 1 फ़रवरी तक

हिम्मतनगर में भव्य पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से निवेदन है कि इस पावन अवसर पर उपस्थित होकर अधिक से अधिक धर्मलाभ अवश्य प्राप्त करें।

वैसे तो भरत क्षेत्र की गतिविधियों की जानकारी

आप सभी को सोशल मीडिया के माध्यम से निरंतर मिलती रहती है।

अब आइए रुख करते हैं पूर्व विदेह क्षेत्र की ओर,

जहाँ से हमारे संवाददाता

वहाँ की ताज़ा अपडेट्स के साथ हमारे साथ जुड़ रहे हैं…

Scene 1

(ओमकार ध्वनि…)

News reporter: जय जिनेन्द्र 🙏🏻 धन्यवाद निराग शाह। इस समय हम उपस्थित हैं पूर्व विदेह क्षेत्र में, जहाँ के भव्य समवसरण में सीमंधर भगवान की दिव्य वाणी अभी-अभी खिरी है।

इस वाणी में भगवान द्वारा छः द्रव्य, सात तत्त्व और आत्मानुभूति के उपाय का अद्भुत विवेचन किया गया। आइए, यहाँ उपस्थित श्रद्धालुओं से ही जानते हैं—कि विदेह क्षेत्र का जीवन कैसा होता है।

News reporter to Videhkshetra Jeev: भाई साहब, आप बताइए—

कैसा लगता है विदेह क्षेत्र में?

Videh Kshetra Jeev: यह अनुभव… शब्दों से परे है। वचनातीत, अद्भुत और आश्चर्यकारी। त्रिलोकीनाथ प्रभु की वाणी को प्रत्यक्ष सुनकर मेरा यह नरभव सफल हो गया ऐसा लगता हैं, यह मोह शत्रु काँप उठता हैं; वीतराग मार्ग का बहुमान ह्रदय में आता हैं और आनंद अंतर में नहीं समाता!

पूर्वभव में जब हम सोनगढ़ में पूज्य गुरुदेवश्री के माध्यम से जैसा तत्वज्ञान करते थे, तब हमेशा यह भावना भाते थे कि यह जिनवाणी हमें निरंतर सुनने मिले और मोक्षमार्ग में आगे बढ़ने में प्रेरणा दे। शायद यही पवित्र भावना के फल में आज यहाँ साक्षात प्रभु के समवसरण में जिनवाणी सुनने का लाभ मिल रहा हैं!

उस समय तो विशेष रूचि नहीं थी पर तत्त्व की बाते अच्छी लगती थी। यहाँ आकर तो ऐसा लगता है मानों हम भगवान ही है!

News reporter: वाह! आपको जानकारी के लिए बता दू कि भरतक्षेत्र से हमारे साथ इस प्रोग्राम के माध्यम से LIVE अनेक जीव जुड़े हुए है। उनके लिए कुछ सन्देश देना चाहेंगे?

Videh Kshetra Jeev: मैं भरत क्षेत्र के सभी भव्य जीवों से बस यही निवेदन करता हूँ—

“कल करूँगा, अगले भव में करूँगा”

ऐसा विचार न करें। ऐसी आलस न करे!

पूज्य गुरुदेव श्री ने तत्व का यथार्थ निरूपण किया हैं।

इसलिए नियमित स्वाध्याय करें, उनके प्रवचनों का श्रवण करें

और अपने मोक्ष मार्ग को प्रशस्त इसी भव में करें, विलम्ब न करे।

News reporter: वास्तव में अद्भुत अनुभव! आपके विचारों के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

पाँच सौ धनुष ऊँचे सीमंधर भगवान की वाणी यहाँ प्रतिदिन तीन बार खिरती है। और यह भी उल्लेखनीय है कि भरत क्षेत्र की अगली चौबीसी में जब तेरहवे तीर्थंकर का समय होगा तब यहाँ विदेह क्षेत्र में सीमंधर भगवान निर्वाण को प्राप्त करेंगे।

यह विदेह क्षेत्र का पूर्व भाग है— जो सुमेरु पर्वत की पूर्व दिशा में स्थित है। सीता नदी इस क्षेत्र के मध्य से प्रवाहित होती है।

यह सीमंधर स्वामी की निवासभूमि है— जहाँ तीर्थंकर, चतुर्विध संघ और गणधरगण सदा धर्म-प्रवर्तन हेतु विहार करते हैं।

यहाँ अहिंसा धर्म नित्य प्रवर्तमान रहता है। ज्ञानीजन अंग और पूर्वगत श्रुत का अध्ययन करते हैं।

सामान्य रूप से यहाँ मनुष्यों का शरीर पाँच सौ धनुष ऊँचा और आयु एक पूर्वकोटि वर्ष की होती है। हमेशा ही यहाँ भरत क्षेत्र के चौथे काल के जैसी परिस्थिति रहती हैं। नारद का भी यहाँ गमनागमन रहता है।

News reporter (Closing):

विदेही नाथ की वाणी सुनकर

हम स्वयं को भी विदेही अनुभव करें।

मैं हूँ सहज शाह,

कैमरामैन आर्जव शाह के साथ,

पूर्व विदेह क्षेत्र से,

CYF News पर।

News Anchor: बहुत-बहुत धन्यवाद सहज शाह, उस विस्तृत और सटीक रिपोर्ट के लिए।

और इस समय की बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़

हमें अभी-अभी जानकारी प्राप्त हुई है कि

श्रुतनंदी मुनिराज को केवलज्ञान की प्राप्ति हो चुकी है।

बोलिए—

श्रुतनंदी मुनिराज की जय हो!

तो दर्शको, आपको बता दे कि CYF न्यूज़ आपके समक्ष आज एक special coverage लेकर आया हैं! जो शायद आपने आज तक न कभी सुना होगा और नाही कभी देखा होगा! मैं इसके बारे में ज़्यादा न कहकर आपको सीधा ले चलता हु हमारे संवाददाता ज्ञायक जी के पास!

Scene 2

News Anchor: जय जिनेन्द्र ज्ञायक जी! आज की ख़ास पेशकश के लिए सभी दर्शक बहुत excited हैं!

News Reporter: जय जिनेन्द्र! दर्शको, आपने NASA ISRO द्वारा extra terrestial life या aliens के बारे में सुना होगा। अनेक historical sites और mythological stories, movies में ऐसे जीवो के उल्लेख मिलते हैं जो आधे मनुष्य और आधे जानवर हो।

पर क्या आपको पता हैं कि विश्व में ऐसी भी जगह हैं जहाँ ऐसे जीव सचमे पाए जाते हो? हाँ! वह जगह का नाम हैं कुमानुष द्वीप। और मैं आज वही से आपके लिए LIVE रिपोर्टिंग कर रहा हु।

ये कुमानुष द्वीप महासमुद्रों में island के जैसे स्थित होते हैं! इन द्वीपों को कुभोगभूमि भी कहते हैं। यहाँ अनेक विचित्र और कुरूप मनुष्य रहते हैं।

वह कैसे होते हैं, चलो यही के एक निवासी को पूछते हैं।

News Reporter: अरे भाई! तुम्हारा शरीर तो मनुष्य जैसा हैं पर मुँह इतना बदसूरत शेर जैसा क्यों हैं?

कुमानुष: इस कुभोगभूमि में सब जीव ऐसे ही जन्म लेते हैं। किसी का मुँह शेर, बाघ, सुकर, गाय, बन्दर आदि जैसा होता हैं तो किन्ही जीवो के कान बहुत लम्बे होते हैं तो कोई एक टांग वाले होते हैं। बहुत विचित्र और अजीब शरीर होता हैं यहाँ के जीवो का।

News Reporter: हाँ! पर मैं तो विदेह क्षेत्र से यही सुनकर आया हूँ की यह शरीर आपसे भिन्न हैं। आप तो भगवान आत्मा हो! शायद शरीर के सौंदर्य प्रति तीव्र आसक्ति के कारण ही ऐसा शरीर मिलता हैं! आपके द्वीप के विषय में कुछ बताना चाहेंगे?

कुमानुष: पुरे ****ढाई द्वीप में कुल ऐसे ९६ कुमानुष द्वीप हैं। यह जघन्य भोगभूमि हैं। कुमानुष यहाँ मीठी मिटटी और कल्पवृक्ष से खाना खाते हैं। वन और गुफाओं में रहते हैं।

News Reporter: अच्छा! और आपका भरत क्षेत्र के जीवो के लिए कोई सन्देश?

कुमानुष: आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्तचक्रवर्ती “त्रिलोकसार” ग्रन्थ में कहते हैं कि जो जीव उच्च मुनिलिंग धारण करके ज्योतिष, मन्त्र, तंत्र आदि करे, करावे; मंदिर, तीर्थ आदि बनाने के लिए आरम्भ परिग्रह धन इकठ्ठा करे करावे, कुतप आदि करे - वे मिथ्यादृष्टि कुलिंगी जीव मरके यहाँ जन्म लेते हैं। जो श्रावक ऐसे कुलिंगिओं की सेवा करे, कुपात्रों को दान दे आदि वे ऐसी हीन दशा को प्राप्त करते हैं।

इसलिए हमेशा सावधान रहो! सच्चे देव शास्त्र गुरु का परिक्षाप्रधानी बनके निर्णय करो। कुवेषधारी से दूर रहो। और सच्चे मुनिराजो की खूब भक्ति करो, आहार, सेवा आदि कार्य में उत्साही रहो और निर्ग्रन्थ दशा की भावना हमेशा भाओ।

News Reporter: बहुत बहुत धन्यवाद! हमें विश्वास हैं कि आपकी बातो पर हमारी तत्वप्रेमी audience जरूर विचार करेगी।

तो ये थी आजकी कवरेज -

मैं ज्ञायक शाह,

कैमरामैन आर्जव शाह के साथ,

लवणसमुद्र के पाताल से,

CYF News पर।

News Anchor:

धन्यवाद ज्ञायक जी! और इसी के साथ एक और महत्वपूर्ण अपडेट—

हमारे संवाददाता शुभ शाह

इस समय नरक गति में पहुँच चुके हैं।

आइए,

सीधे वहीं चलते हैं

और जानते हैं वहाँ के ताज़ा हालात…

Scene 3

News Anchor: जी, शुभ शाह— वहाँ की क्या स्थिति है? नरक गति से हमें ताज़ा अपडेट दीजिए।

News reporter: मत पूछो यहाँ के हाल, यहाँ -

News Anchor: शुभ जी, माफ़ कीजियेगा पर आपकी आवाज़ ठीक से नहीं आ रही हैं।

News reporter: ओह। लगता हैं यहाँ नेटवर्क का थोड़ा इशू हैं। एक मिनट दीजिये (mic सेट करते हुए) हाँ, अब आ रही हैं?

News Anchor: हेलो हेलो।

News reporter: जय जिनेन्द्र। सुनाई दे रही हैं मेरी आवाज़?

News Anchor:

(not able to hear, show chaos)

News reporter: यहाँ की रिपोर्टिंग हो या नारकीओ की उन्हें बचाने की पुकार - किसी को सुनाई नहीं देती। कोई यहाँ इन्हे सुनने वाला नहीं हैं।

News Anchor: हा शुभ जी - अब मैं आपको सुन सकता हूँ।

News reporter:  मैं ऐसा कह रहा था कि यहाँ के हाल मत पूछो तो बेहतर होगा!

इस पृथ्वी के निचे ७ नरक हैं। यहाँ इतनी भयानक गर्मी पड़ती हैं कि शरीर जल के राख हो जाये, ठण्ड इतनी होती हैं कि सूर्य भी जम जाये। ये मनुष्य तो दिल्ली की AQI को लेकर इतना परेशान हो जाता हैं, गलती से यहाँ की महा दुर्गन्धमयी हवा का एक झोंका भी आ गया तो क्या होगा? ओहो मुर्ख हैं वह लोग जो नरक को कल्पना कहकर मज़ाक बनाते हैं!

आइए, यहीं उपस्थित नारकीओ से ही उनकी वास्तविक स्थिति जानने की कोशिश करते हैं।

News reporter: अरे भाई क्या कर रहे हो? कहाँ जा रहे हो ?

नारकी १: (in hand with weapon) मैं बदला लेकर रहूँगा! (गुस्से से ) किसी को नहीं छोडूंगा ! मुझे उसने कितना मारा-काटा असह्य वेदना दी, अब उसे कोई नहीं बचा सकेगा!

News reporter: अरे क्या हुआ? इतना गुस्सा? लगता हैं तुम्हे भूख लगी है!

नारकी १: भूख? जब से यहाँ जन्मा हूँ तब से एक कण भी नसीब नहीं हुआ! इतनी भूख लगी हैं कि पुरे तीन लोक का अनाज खा लू! खाने को मिटटी और पीने को वैतरणी नदी का खून! पूर्व भव में मैंने मांस खाया, रात्रिभोजन किया था - इसी फल में आज यह हाल हैं!

News reporter: ओहो भयंकर हालत हैं यहाँ तो! मनुष्य होता तो इतने दुःख देख suicide ही कर लेता!

नारकी २ (enters): उसी आत्महत्या के कारण ही तो मैं यहाँ हु! पूर्वभव के कुछ दुःख से बचने के लिए मैंने सोचा कि मर जाऊंगा तो दुःख चले जायेंगे। यहाँ आकर तो शरीर के टुकड़े हो जाये तो भी आयु पूर्ण हुए बिना मरना सम्भव नहीं हैं!

News reporter: हमारे जो भी युवा दर्शक जुड़े हैं उन्हें इससे बोध लेना चाहिए कि - दुःख दूर करने का उपाय आत्महत्या नहीं, आत्म आराधना हैं!

नारकी २: अरे दुष्ट! तुम तो मनुष्य गति के वही मित्र हो ना जिसने हमें कभी सही मार्ग नहीं बताया! नॉनवेज खाने में प्रेरित किया, जैनी होकर भी दारु पार्टी क्लब्स आदि में मुझे ले जाते थे! तू ही तो मुझे violent मूवीज दिखाता था, गेम्स खिलाता था!

आज यहाँ की पीड़ा सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी वजह से हैं! मैं तेरे कारण ही नरक में आया हु!

नारकी १: मूढ़! तुझे शिबिर में जाने के लिए कितना कहा! पर तू तो शिबिर में आकर भी सिर्फ मौज मस्ती ही करता रहा, अपने में कोई बदलाव नहीं लाया! सही ही हुआ तेरे साथ! नरक ही तू deserve करता हैं!

नारकी २: हा हा! पहले अपने को तो देखो! तुमने अपना कीमती युवा अवस्था का समय खाने पिने घूमने फिरने, सप्त व्यसनों में ही तो बिता दिए! देव शास्त्र गुरु की विराधना की! मजाक बनाया!

नारकी १: तुम सही कह रहे हो! काश हमने लोगों की देखा-देखि न करके सच्चे मार्ग को चुना होता! पापो में न पड़के स्वयं को जाना होता!

मित्रों,

जो मुझे सुन रहे हैं—

मनुष्य भव अत्यंत दुर्लभ है।

और सच्चे देव-शास्त्र-गुरु का मिलना

तो उससे भी महा दुर्लभ। इसे हलके में मत लो!

नारकी २: हाँ इसलिए नर भव आत्मानुभूति करके सफल कर लो! यदि अवसर चूका तो भव भव पछताओगे!  जैसे आज हम पछता रहे है! अभी तो ना जाने कितना समय यहाँ दुःख में बीतेगा! यहाँ ना तो मंदिर है, ना कोई समझाने वाले गुरु और ना ही कोई जिनवाणी। हम भी यही भावना भाते है जल्दी ही मनुष्य भव प्राप्त करके सम्यक दर्शन वरन करके मुनि धर्म अंगीकार करके मोक्ष महल में निवास करेंगे। सचमे मोक्षमार्ग तो -

नारकी १ (interrupts): चुप! बहुत बोलता हैं तू! ये सब ज्ञान पूर्वभव में देना था न! अब क्या फायदा? अब तो तू गया!

नारकी २: तुमने उस समय मेरे पैसे चुराए थे न! तू क्या मुझे मारता था? आज मैं तुझे सजा दूंगा! आजा!

(दोनों फिरसे झगड़ने लगते हैं)

News reporter:

तो युवासाथिओं, देखा आपने ये नारकीओ की दशा? दिन-रात झगड़ते रहते हैं। धर्म की बात शायद सुनने सुनाने वाले भी मिल जाये पर रुचती नहीं हैं। चेतो चेतन चेतो!

अब विषयो में ना ही रमेंगे, चिदानंद पान करेंगे!

इसी प्रेरणा के साथ,

मैं आपका Reporter शुभ शाह,

कैमरामैन [ ] के साथ,

७वी नरक की भयानक ठण्ड के बीच,

CYF News के लिए।

News Anchor:

बहुत-बहुत धन्यवाद शुभ शाह।

नरक गति के हालात तो वाकई चौंकाने वाले हैं।

अब सवाल ये उठता है—

अगर नरक इतना पीड़ादायक है,

तो क्या स्वर्ग वाकई ultimate happiness है?

आइए इस भ्रम को भी आज तोड़ ही देते हैं।

सीधे चलते हैं स्वर्ग लोक,

जहाँ से हमारे संवाददाता संयम शाह

इस समय लाइव रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

Scene 3

News Reporter:

जय जिनेन्द्र भावी सिद्धों 🙏🏻

इस समय मौजूद हूँ

स्वर्ग के इस मनोहारी, glittering,

Instagram-worthy वातावरण में ✨

चारों तरफ़ चमक, देव, समृद्धि, वैभव — देखकर तो यही लगता है कि यहाँ के residents हमेशा “Living their best life” मोड में रहते होंगे।

पर reality क्या है — आइए सीधे देवों से ही पूछते हैं।

News Reporter: क्यों भाई, यहाँ की life तो बड़ी मस्त होगी?

देव 1 : दिखती तो मस्त ही है भाई, पर अंदर का हाल पूछो तो— यहाँ हर देव दूसरे देव से जल रहा है किसका विमान बड़ा, किसीके महल ज़्यादा, किसका पुण्य high package वाला— बस इसी comparison में मन कभी शांत ही नहीं रहता। ऊपर से constant tension— कहीं कोई बड़ा देव हाथी-घोड़ा बनाकर ड्यूटी ना लगा दे!

News Reporter: अरे भाई! Swarg ya corporate office? 😅 अच्छा, आपके गले में ये माला…

देव 2 : मत याद दिलाओ भाई। Already tension में हूँ। मेरे सागरों की आयु विषय भोग में चुटकियों में कहाँ बीत गयी पता ही नहीं चला। बस 6 महीने और— उसके बाद

पता नहीं अगली posting किस गति में मिलेगी। और हाँ जो लोग मनुष्य गति से मुझे सुन रहे है वो इस भ्रम में बिलकुल ना रहे के देव लोक ultimate है उन्हें बताना चाहूंगा यहाँ हमेशा मृत्यु के बाद कहाँ जायेंगे उसका भय रहता ही हैं!

देव 1: बिल्कुल सही कहा। हे भव्य जीवों — स्वर्ग सुखमय लगता ज़रूर है, facilities भी top-class हैं, पर— यहाँ संयम नहीं पलता, यहाँ से मोक्ष नहीं जाया जाता। यह जगह “मज़ा लेने का tourist spot” नहीं है। यहाँ जीव सिर्फ़ अपने पुण्य खर्च करने आते हैं, और सागरों तक में कैद रहते हैं।

News Reporter: हमारे मनुष्य साथी दिन रात व्रत उपवास करके मरके स्वर्ग जाना चाहते हैं। उनके लिए आपको कुछ कहना हैं?

देव 2 : हम उन्हें बस कहना चाहते हैं—

देव गति में सुख बस एक भ्रम हैं। केवल मनुष्य भव में ही मुनि धर्म अंगीकार करके मोक्ष संभव है। हम देव भी वहाँ आने को तरसते है जहाँ श्रुत ज्ञान का लाभ, तप और संयम की प्राप्ति हो सकती है। इसलिए आप मनुष्य भव को सफल और सार्थक करे!

News Reporter: चलिए मैं आपको ले चलता हूँ इस लोक से सबसे ऊपर वाले देव विमान यानी सर्वार्थसिद्धि विमान में -

[up animation]

News Reporter: ये सर्वार्थसिद्धि के देव है! 33-33 सागर तक धर्म की चर्चाये ये निरंतर करते रहते है। आश्चर्य यह हे की एक भी चर्चा repeat नहीं होती!

अब आप ये मत सोचना के ये तो मात्र चर्चा ही करते रहते है... ये सभी देव सम्यग्दृष्टि होते हैं, एक भावावतारी होते है! अगले भव में ही मोक्ष जायेंगे!

News Reporter: वाह! देवो में भी भिन्न भिन्न भावो की विचित्रता है! तो हमने देखा सागरो की आयु वाले देव भी सुखी नहीं है तो हम किस भ्रम में बैठे है?

इसलिए हमें भावना भानी चाहिए

"नर भव मिला है में अपूर्व कार्य करूँगा जिन शासन पाया अब भव का अभाव करूँगा... हे मेरा निश्चय हे सम्यक निश्चय...2 "

मैं हूँ Reporter संयम शाह,

कैमरामैन [ ] के साथ,

स्वर्ग की temporary चमक के साथ,

देखते रहिये CYF news।

News anchor: वास्तव में चारों गति की विडम्बना ही है... कही भी सुख नहीं है और हम व्यर्थ में ही भ्रम से सुख की कल्पना कर लेते है!

और इसी बीच— एक breaking update— अभी-अभी खबर मिली है कि यहाँ से दो जीव निगोद पहुँच चुके हैं।

अब सवाल ये है—

जहाँ कोई choice ही नहीं होती, वहाँ की स्थिति कैसी होगी?

सीधे चलते हैं हमारे संवाददाता नमन शाह के पास, जो इस समय निगोद से लाइव रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

Scene 4

News reporter:  यहाँ के हालात…और भी बत्तर हैं। आलू जैसे underroot vegetables के सुई के अनंतवे भाग में अनंत अनंत अनंत निगोदिया जीव होते हैं। अरे ओ आलू प्याज लहसून खाने वालों - ज़रा सावधान हो जाइये! क्योंकि जो अभी भी अपनी cravings पे control नहीं होता तो यहाँ आने की नौबत आ जाएगी।

कहा जाता है - जो लोग ऐसा कहते है न कि “हमें तो मरने की भी फुरसत नहीं है” वो लोग यहाँ आते हैं। इसी स्थिति यहाँ प्रत्यक्ष देखि जा सकती है। यहाँ सच में ऐसा ही है - एक श्वास में 18 बार जन्म मरण हो रहा है! इनसे तो हम बात भी नहीं कर सकते! अरे! बड़ी दयनीय दशा है भाई!

कुछ जीव तो यहाँ ही रहते है और आज तक कभी यहाँ से बाहर ही नहीं निकले हैं - जिन्हे हम नित्य निगोदिया जीव कहते है!

हम कितने भाग्यशाली हैं कि हमें यह दुर्लभ मनुष्य गति प्राप्त हुई, उत्तम कुल मिला, उत्तम देश मिला, और सच्चे देव-शास्त्र-गुरु का समागम मिला। फिर भी हम कहते है हमारे पास मरने की फुरसत नहीं है! गुरु हमे कहते हैं - मंदिर जाओ! तो Time नहीं हैं! स्वाध्याय करो! टाइम नहीं हैं! पूजा करो! टाइम नहीं हैं!

यहाँ फसे जीव भी यही कहते थे - टाइम नहीं हैं! अब देख लो आज इनके क्या हाल है! अब ना जाने कब यहाँ से ये बाहर निकलेंगे!

वास्तव में तो हमें स्वयं पर दया करनी है। क्योंकि ऐसे अनंत भव हमने भी किए हैं।

इसीलिए— अब बहाने नहीं, अब टालना नहीं। इसी भव में हमे सम्यग्दर्शन प्राप्त करने का पुरुषार्थ करना चाहिए!

मैं Reporter नमन शाह,

आलू के अंदर से,

देखते रहिये CYF news

News anchor: चारों गतियों की दशा वास्तव में भयानक है। चारों गतियों में दुःख ही दुःख है— कहीं कम, कहीं अधिक, पर सुख तो कहीं भी नहीं।

और इसी बीच एक और Breaking News हमारे सामने आयी हैं —

अभी-अभी सूचना प्राप्त हुई है कि एक जीव को निर्वाण की प्राप्ति हुई है।

आइए चलते हैं हमारे संवाददाता के पास— जो इस समय अष्टम पृथ्वी - सिद्धशिला पर पहुँच चुके हैं— और हमें सुना रहे हैं आँखों देखा हाल।

Scene 5

**News reporter: “**जहाँ राग द्वेष की गंध नहीं बस सुख अनुपम ही मिले,

मुक्ति है नगर,सिद्धो का है घर, चलो सिद्धो की छाँव चले”

यहाँ का तो वातावरण ही अद्भुत है इतनी शांति तो कही नहीं देखी.... सभी जीव अपने-अपने हाल में मस्त... किसी को किसी से लेना देना नहीं है... सब परिपूर्ण.. स्वाधीन..निर्भार… बस जैसा जीव का स्वभाव हैं, वैसा का वैसा प्रगट होने की दशा ही तो सिद्ध दशा हैं।

इसी आनंद के साथ -

मैं हूँ सिद्ध शाह,

अनंत सुखी जीवों के मध्य में -

देखते रहिये CYF news।

News anchor: वाह…अद्भुत। सिद्धों की यह दशा देखकर, और चारों गतियों के दुःख को स्मरण कर— यह स्पष्ट हो जाता है कि हमारा बस एक ही लक्ष्य होना चाहिए - ध्रुव अचल और अनुपम ऐसी सिद्ध अवस्था को प्राप्त करना**।**

और अब— आइये लेते है weather और share market की जानकारी !!

Scene 6

News reporter: क्या बताऊ अब... जितनी बारिश, ठंडी, गर्मी होनी है होके ही रहेगी...जानकारी लेने से अच्छा है आप अपनी सेफ्टी लेकर घर से निकले... किसी को भी blame ना करे! परिणाम शांत रखें!

Share market का भी वही हाल है उदय से ज्यादा और उदय से कम किसी को भी नहीं मिलेगा इसलिए निश्चिन्त और निर्भार रहे! अकेले रहे तब तत्त्व चिंतन करें और 2 या 2 से अधिक हो तो तत्त्व चर्चा करें !!

News anchor: इस प्रकार आज की news बुलेटिन में हमने तीन लोक के अनेक समाचारों के माध्यम से देखा यह जीव अपनी भूल से दुःखी है और स्वयं की भूल सुधारकर सुखी हो सकता है। और भूल मात्र इतनी है अपने में अपनापन नहीं किया!

हम सभी युवा साथी भी -

अरहंतो का आधार,

सिद्धो का सेंटर,

आचार्यो का आराध्य,

उपाध्यायों का उपास्य,

मुनियों का मननीय.. ऐसा चिंतनीय चेतन तत्त्व मैं हूँ ऐसा अनुभव करें !!

पर्याय रही तो फिर मिलेंगे -

पर जब भी मिलेंगे तो सिद्धालय में ही मिलेंगे

और ऐसे मिलेंगे के वापस से कभी ना बिछड़ेंगे,

ॐ नमः सिद्धेःभ्यः 🙏🏻🙏🏻

(Script Edited by - Soham Shah)